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जमाना खुदा की रजा चाहता है

 जमाना खुदा की रजा चाहता है


ए सब्ज गुंबद वाले मंजूर दुआ करना



और खुदा मर्जी ए मुस्तफा चाहता है

के मरीज ए मोहब्बत दवा क्या करेगा

बो तेबा की ठंडी हवा चाहता है

मुसीबत कभी उसको छू ना सकेगी

अरे हमेशा जो मां की दुआ चाहता है



इस सदी में पीर ऐसा ढूंढते रह जाओगे   



हरसू  अवर रहमतों का छा गया

बारवी का चांद नजर आ गया

जिसे चाहते हैं हुजूर आला हजरत

उसे मेरा अख्तर रजा चाहता है


https://docs.google.com/document/d/1zv8yGfJuP6nMroVQC8g_MT1BHB_C6JlGkvoqnP_tldA/edit?usp=sharing


Note :- is naat ki hindi mein typing hm ne ki hai.is naat ka owner koi or hai hm nahi hain (hindi mein hmne likhi hai).

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